नेपाल पत्रकार महासंघके केन्द्रीय समितिम पहिला फ्यारा थारु समुदायके प्रतिनीधि हुइल बा। २४ औ महाधिवेशनमसे थारु पत्रकार संघके केन्द्रीय अध्यक्ष लक्की चौधरी निर्वाचित सदस्य हुइट। चौधरी नम्मा समयसम पत्रकारिता लग्टी आइल बाट। उहाँ सरकारी पत्रिका गोरखा पत्र दैनिकम फे आवद्धबाट। नेपाल पत्रकार महासंघके केन्द्रीय सदस्यम निर्वाचीत हुइल पाछ लक्की चौधरीसे यी लौव अग्रसान साप्ताहिकके सम्पादक सन्तोष दहितसे करल बातचीत प्रस्तुत बा ।
नेपाल पत्रकार महासंघके २४ औं महाधिवेशनसे केन्द्रीय सदस्यम विजयी हुइली। Continue reading “पेशागत सुरक्षा पहिला काम : केन्द्रीय सदस्य लक्की चौधरी”
Author: admin
संस्कृतिको जीवन्तता ‘नेन्धर’
लेखक, साहित्यकार तथा पत्रकार लक्की चौधरीको पछिल्लो कृति नेन्धर (कविता संग्रह) हालै बजारमा आएको छ। यसअघि चार कृतिका स्रष्टा लेखक तथा साहित्यकार चौधरीको यो पाँचौ कृति हो। यसअघि उनले दुईवटा गजल संग्रह, एउटा थारु संस्कृति परिचय, एउटा लेख संग्रह प्रकाशनमा आइसकेका छन्। साहित्य, पत्रकारिता, खोज अनुसन्धान तथा नयाँ विषयवस्तुमा कलम चलाउन विशेष रुची राख्ने लेखक, साहित्यकार तथा पत्रकार चौधरी थारु भाषा, साहित्य तथा संस्कृतिमा दख्खल राख्छन्। राजनीतिशास्त्र र समाजशास्त्रमा स्नातकोत्तर गरिसकेका चौधरीले ‘जर्नालिज्म डेभपलेपमेन्ट्स’मा हाल स्नातकोत्तर गरिरहेका छन्। थारु मातृभाषासँगै नेपाली भाषा साहित्यको पनि चौधरीले उत्तिकै ज्ञान राख्छन्। Continue reading “संस्कृतिको जीवन्तता ‘नेन्धर’”
हामी मधेसी हुन तयार छैनौं : रुक्मिणी चौधरी

संघीय लोकतान्त्रिक राष्ट्रिय मञ्च (थरुहट)
सुक्रनगर–२, चितवनमा जन्मिनुभएकी सभासद रुक्मिणी चौधरीको २०५४ मा सिसनिया–२, दाङमा विवाह भयो। २०४७ सालदेखि नै हाइस्कूल अध्ययनका क्रममा उहाँ नेविसंघको विद्यार्थी राजनीति सुरु गर्नुभएको थियो। बुवा नेपाली कांग्रेसको कार्यकर्ता भएकै कारण उहाँ पनि कांग्रेसकै राजनीतिमा सुरुमा होमिनुभयो। तर पछि कांग्रेसको राजनीति र कार्यशैलीबाट विरक्त भएपछि उहाँ थरुहट स्वायत्त राज्य परिषद हुँदै संघीय लोकतान्त्रिक राष्ट्रिय मञ्चबाट २०६४ सालमा सभासद हुनुभयो। सो दौरानमा पार्टीभित्र अनेक उतारचढाव आएपछि उहाँ आफ्नै नेतृत्वमा २०६८ सालमा संघीय लोकतान्त्रिक राष्ट्रिय मञ्च (थरुहट) पार्टी बनाएर पार्टीको नेतृत्व गर्दै सभासदको भूमिका निर्वाह गरिरहनुभएको छ। प्रस्तुत छ उहाँसँग लक्की चौधरीले गरेको कुराकानीको सारसंक्षेप: Continue reading “हामी मधेसी हुन तयार छैनौं : रुक्मिणी चौधरी”
बिरामी स्याहार्दै पूर्व कमलरी
रुबी रौनियार, चरिकोट (दोलखा)-बिहान आठै बजे उनीहरु सेतो कुर्ता सुरुवाल, कालो स्विटर र सेतो सलमा छात्रावासबाट निस्कन्छन्। दोलखा जिरीस्थित जिरी प्राविधिक शिक्षालयमा हाजिर गरेर जिरी अस्पताल दगुरिहाल्छन्। शिक्षालयमा अनमी तहको प्राविधिक शिक्षा लिइरहेका ४० जना पूर्वकमलरी कहरको विगत बिर्सिएर दिनभर बिरामीको सेवामा जुट्छन्। Continue reading “बिरामी स्याहार्दै पूर्व कमलरी”
लक्की चौधरीको ‘नेन्धर’ लोकार्पण
काठमाडौं- पत्रकार तथा साहित्यकार लक्की चौधरीद्वारा लिखित ‘नेन्धर’ कविता संग्रहको एक कार्यक्रमका बीच शुक्रबार यहाँ लोकार्पण गरिएको छ। वरिष्ठ साहित्यकार तथा नेपाली गजलनायक ज्ञानुवाकर पौडेल, सभासदहरु तेजुलाल चौधरी, वैजनाथ चौधरी, गोपाल दहित, रुक्मिणी चौधरी, थारु बुद्धिजिवी भुलाई चौधरी, महेश्वरप्रसाद चौधरी, रामलाल चौधरीले सो पुस्तकको संयुक्तरुपमा लोकार्पण गरेका हुन्। Continue reading “लक्की चौधरीको ‘नेन्धर’ लोकार्पण”
महिला भलिबलकी आशा सरस्वती चौधरी
काठमाडौं- सरस्वती चौधरीको क्विक स्पाइक र ब्लकले राष्ट्रिय भलिबलको नतिजालाई प्रभाव पार्ने गरेको छ । महिला भलिबलकी नयाँ सनसनी सरस्वती वर्तमानमा यो खेलकी नेपाल नम्बर एक क्विक स्पाइकर हुन् । ब्लक र स्पाइक दुवैमा हावी हुन सक्ने क्षमता भएकी सरस्वतीलाई नयाँ पुस्ताको प्रतिभावान खेलाडीका रुपमा लिने गरिन्छ । Continue reading “महिला भलिबलकी आशा सरस्वती चौधरी”
मैं पत्रकारितामे आइटुँ : सोनु थारू
थारू सलिमा अर्थात् थलिउडके क्षेत्रमे चिरपरिचित नाम हो, सोनु थारू। उहाँ थारू सलिमामे एकदमे उदयीमान नायिकाके रुपमे आपन पहिचान बनैना सफल हुइल बाटी। ‘मोर जंग’ सलिमाके छायाँकनके क्रममे समग्र थारू सलिमाके अवस्था, पारिवारिक, राजनीतिक अवस्थालगायत सवालमे उहाँसे कैगैल बातचितके अंश : Continue reading “मैं पत्रकारितामे आइटुँ : सोनु थारू”
कवितामे छाईलः थरुहटके मुद्दा
कृष्णराज सर्वहारी- थारू कौनो फेन हालतमे मधेशी नै हुइट। ओहेसे थारून् मधेशीक् सूचीकरणसे हटाइ परल कना माग कर्टी थरुहट संयुक्त संघर्ष समिति बैशाख १२ गते प्रधानमंत्री सुशील कोइरालाहे ज्ञापनपत्र बुझाइल। समितिमे आवद्ध २० ठो संस्थाके प्रतिनिधिलोग प्रधानमंत्री निवास बालुवाटार पुगके ज्ञापनपत्र बुझैलाँ। थारु कल्याणकारिणीसभाके केन्द्रिय अध्यक्ष चन्द्रकुमार चौधरी ज्ञापनपत्र पह्रके सुनैलाँ।
ओहेरोज संविधानसभाके अध्यक्ष सुवास नेम्वाङ ओ एमाले अध्यक्ष झलनाथ खनालहे फेन टोली ज्ञापनपत्र बुझाइल। समिति खासकैके ६ ठो माग आगे सर्ले बा। जेकर मुख्य मागमे संविधानसभा सदस्य विधेयक २०७० ओ नेपाल स्वास्थ्य सेवा ऐन २०५३ हे संशोधन कैजैना बनल विधेयक २०७० मे तराईके थारूलगायत आदिवासी जनजातिन्, मुस्लिम आदिहे मधेशी समुदायमे सूचीकरण कैगैल गलत निर्णयहे सच्याइ कैहगैल बा। अध्यक्ष नेम्वाङ थारून् मधेशीमे सूचीकरण कैगैलमे सरकारके ध्यानाकर्षण करैना जनैलाँ।
एकओर राजधानीसे ज्ञापनपत्र बुझैना, सुनुवाइ नैहुइलेसे आन्दोलन कर्ना ठेक्ठी खिटकोर जैटी बा कलेसे इहे क्रममे डोसरओर सामाजिक सञ्जाल फेसबुकमे थारू कौनो फेन हालतमे मधेशी नै हुइट कना अभियान जोर पकर सेक्ले बा। सानोश्री, बर्दियाके सुरज बर्दियाली हाल साउदी अरबमे रहठाँ। उहाँ आपन मनके अभिब्यक्ति असिक लिख्ठाँ–
हमार आपन पहिचान बा, मधेशी निहुइटी
थारू हमार छुट्ट निशान बा, मधेशी निहुइटी
तराईबासी पर्ली हम्र, भूमिपुत्र कैक जन्ना
बर्षौ साल पुरान प्रमाण बा, मधेशी निहुइटी
जागी युवा, घन्काइ नारा, जय थारूवान कैख
साथ हमार भगवान बा, हम्र मधेशी निहुइटी
सुरज बर्दियाली एक टे युवालोगन जागे कहठाँ। उपरसे हमार संगे भगवान बा कना दुवा मंग्ठा। उहाँ डोसर रचनामे लिख्ठाँ–
भूमिपुत्र हुइटि कैख डेखाइ पर्ना बा
सरकारह फे ठिउन्ही टेकाइ पर्ना बा
थारून्हक पहिचानम गरल गिद्दे नजर
जरसे उक्ठाख यहाँसे मेटाइ पर्ना बा
चामचिचम रबि ट मिल्जाइ मधेसम एकदिन्,
विरोध कैख थारूवान छेकाइ पर्ना बा
इहे क्रममे धनगढीके सत्यनारायण दहित मुक्तकमार्फत् असिक आपन पहिचानके लग ज्यान न्यौछावर कर्ना प्रण कर्ठा
थारून्के अलग पहिचान बटिन इतिहास कहटा।
ओइन्के गुरिया गहना चालचलन गीतबाँस कहटा।
यहाँ आदिवासी थारू जाति तराईके भूमिपुत्र हुइट,
ज्यान डैडेब् मधेसी नैबनब थारून्के सास कहटा।…
कवितामे फेन आन्दोलनके शक्ति रहठ। सत्यनारायण दहित मुक्तकमार्फत् जौन हुंकार कर्ले बटाँ, ऊ मुठ्ठी उठाके करल कनौ नेताके भाषणसे कम नैहो।
टुहार जग्गक खुटा गारक, साँढ छाँटट,का ह्यरटो टु?
टुहार छाई बहिन्यनक, नाक काटट का ह्यरटो टु?
टुहार नसम टाटुल खुन बा कि नाई अई थारू?
मधेशी बनाक टुहार पहिचान ख्वासट का ह्यरटो टु?
उप्रक् मुक्तक मार्फत् राजधानीमे बैठ्टी रहल प्रसादु थारू आपन समुदायके युवन् ललकर्टी बटाँ। कि आपन पहिचान मेटजैनामे फेन टु का हेरटो? ओहोर नेपालगञ्जसे कवि सोम डेमनडौरा फेन प्रसादु थारूक् हस रहानमे रहान मिलैटी बटाँ। उहाँक् शव्दा असिक बोल्ठिन्ः
कठ निबोल्ना, निसुन्ना, चाल निकर्ना मुवल हुइट
आंग फुहर औरकम चिल्लर डेखुइया बुहल हुइट
अई थारू टुह्र चाल ट करो, जीयल बाटो कलसे
पहिचान चिन्ह निजन्ना सब सामन्तीक दुहल हुइट
माफ करबी, यी टरक लाइन, मै कौन कविके टुक्का डाउनलोड कर्लु। मने रचनामे आगी डम्कल बा।
बराबर डगरामे जब कोई कोरी खटहा, तो हमरे पुरके छोरब
थारूहे मधेशी बनुइया पागल फटहा, तोर घमण्ड टुरके छोरब
स्वदेशसे फेन विदेशमे रबो टे आपन जलम धर्तीके आउर मैया लागठ। हाल कामके सिलसिलामे साउदी अरबमे रहल चितवनके कुमार चौधरी आपन भावना असिक फेसबुकमे अपडेट कर्ठा–
जाँरक खोर्यम जीन बुरो थारू, आप कुछु कर पर्ठा
आपन हक अधिकारके लग सक्कुज लर पर्ठा
औरज कडेही कैख जीन सोचो, यिहे सोचले पाछ पर्ली
थारून मधेशीम बनाइ नि पैबो कैख आघ बह्र पर्ठा
उहाँ यहाँ जाँरक खोरियम नैहैरैना चेतावनी डेले बटाँ। मुनुवा–४, कैलालीके रामचन्द्र चौधरी कामके साउदी खरबमे कतार बटाँ। मने थारून्के पहिचान हेरैना अवस्थामे पुगलमे उहाँक् फेन छटपटी बटिन्।
हम्रे थारू युवा एक्क बोली बनाके उठी।
गाउँ–घर सब ओर हाली जनाके उठी।।
मधेशी नाई, “भूमि पुत्र हम्रे थारू” हुइटी।
सक्कु ओरसे बल्गर यिहे नारा लगाके उठी।
उहाँ गजलके डोसर रचनामे असिक पन्वा डरठाँ–
थारू, भाषा, संस्कृति बचाई जुटी थारू युवा।
अपन थारू पहिचान बनाई जुटी थारू युवा।।
“हम्रे थारू कौनो हालतमे मधेशी नाई हुई”।
बल्गर नारा मिल्के लगाई जुटी थारू युवा।।
‘अई थारू समाज कानम तेल डारके नाइ हुई’।
अपन राज्य स्थापना कराई जुटी थारू युवा।।
सरकारमे आन्ढर बन्के बैठल हमार नेतनके।
मधेशीम डारल भ्रम हटाई जुटी थारू युवा।।
थारू पहिचान सहितके संविधान जारी कराई।
घर–घरसे खबरदारी जनाई जुटी थारू युवा।।
कीर्तिपुरमे हरेक महिनक् अन्तिम शनिवार कविता शृङ्खला हुइठ। चैत २९ गते कञ्चनपुरके कवियत्री प्रकृति पूजाके सुनाइल कवितामे अपन पहिचानके प्रश्न ओ दम डेखाडेना चेतावनी बा।
का बिगार डेलरही हम्र थारूमसे मधेशीम झारडेलो
अरे कुइ ट कहो, हमार पहिचान के हो छिनटा
थारूनके रिस नैडेखल हो हमन गोरु समझटा
अब ट हुइ हम्र पुरुबसे पच्छिउँ सम
एकचो आउर आब थारून्के डेखा डी दम
ओ अन्तमे, यी पंक्तिके ओरौनीमे गायिका सोमती चौधरीक् गाइल टरक गीत फेन यहाँ खौक्ना प्रासंगिक रही। जौन गीतमे थरुहट राज्य बचाइक लग आह्वान कैगैल बा।
आदिवासी थारू हम्रे,
धर्ती पुत्र तराइके
इहे भूमि हुइटा मधेश,
कसिके बचाई पहिचान?
आब नाही छोरब अधिकार,
अइ हो थारू भाइ
चाहे डेहे परी बलिदान
उठे परल ब्यापारी, विद्यार्थी
थरुहट राज्य बचाइक लग।
ए कवि, उप्रक् श्लोक पह्रके का अपनेक कलम फेन नैहुरचुराइठो? यदि हुरचुराइटा कलेसे उठाइ कलम। मारी शव्दरुपी लब्डा, ओकर कप्पारीम, जे हमार पहिचान छिनटा। विदेशमे पसना चुहैटी रहल डाडु भैयन् टे आपन पहिचानके चिन्ता बटिन कलेसे अपनेन पहिचानबिहीन होके जिना मन्जुर बा?
साभारः २०७१ बैशाख २१
आजा आजीन्प्रति हमार दायित्व
बुनु थारू- मै अब्बे पह्राइके सिलसिलामे काठमाडौँके कीर्तिपुर नयाँबजार बैठ्ठुँ। मोर डेरक लग्गेहे एकठो महा बुह्राइल आजी बैठ्ठी। उहाँहे डेख्ठुँ टे मोर अपन दिंवगत आजीक याद हराभरा हुइठ। प्रायः बेराम परटी रहना ओहा उ घरेम केवल अक्केली बैठ्ठी। छावा पटुह्यनके लग्गेहे घर बटिन। कबोकाल एक दुई बचन पुछे अइना खालिस कैठिन। नैटे आउर बेला परिवारलोगन्के कुछु पटै नै। प्रायः जग्गाके बारेम झगरा कैठाँ कैहके उहाँ एकदिन बटैली। एकचो टे उहे बाटेक झोंकेम् उहाँहे कोठम् ठून डेले रहिन। मने पाछे एकजना भलादमी जाके बाहेरसे लगाइल बिल्रा खोलडेली रहिट। Continue reading “आजा आजीन्प्रति हमार दायित्व”
थरुहट आन्दोलनः दुविधामें न राम मिले न रहमान
सीएन थारू- नेपाल राष्ट्र राज्य निर्माण समय में यते पटक पटक भिडन्त भेल्छै। भिडन्त आ अन्तरघुलन से राज्य निर्माणके यी प्रकृया में बहरिया सब जे मुसलमान से हारलो में युद्धके दाहसब सिखने रहै यी भूमी में आपन राज्य फैलाबैमें सफल भेलै। यतवेहेक नै राज्यके मार्ग निर्देशक सिद्धान्त वैदिक हिन्दु सभ्यताके जगमें निर्मित ब्राह्मणवाद मानल गेलै। तै आधारमें सामाजके चरित्र विकास करैके दर्वियानमें असली हिन्दुस्थानाके परिकल्पना करल गेलै। एक भाषा एक भेषके राष्ट्रियता निर्माण करैके नीति बमोजिम करिब २५० बरससे निरन्तर राज्यके श्रोत परिचालन करैत आइब रहल यतेका बहिरियासब रैथानेके प्रथा, चालचलन आ परम्परागत सँस्कृतिके कुरीति, पछौटेपन, अन्धविश्वास आदि कहैत तिरस्कार, उपहास, घृणा आ दमनके माध्यमसे विस्मृतिमें पुगाबैके काम करल्कै। Continue reading “थरुहट आन्दोलनः दुविधामें न राम मिले न रहमान”
